श्री श्याम माता मोरवी का इतिहास
भारतीय संस्कृति की आत्मा केवल इतिहास में नहीं, बल्कि उन अमर कथाओं में बसती है जो युगों से जनमानस को प्रेरित करती आई हैं। इन्हीं दिव्य कथाओं में एक तेजस्वी नाम है - माता मोरवी।
वे केवल दैत्यराज मूर की पुत्री या वीर बर्बरीक (श्याम बाबा) की माता ही नहीं थीं बल्कि वे शक्ति, ज्ञान, त्याग और तपस्या का अद्वितीय संगम थीं। उनका जीवन एक ऐसी साधना थी जिसमें प्रतिशोध की ज्वाला ज्ञान में परिवर्तित होती है, जो मातृत्व धर्म की वेदी पर सर्वोच्च बलिदान बन जाता है।
कामरूप की तांत्रिक भूमि में जन्मी माता मोरवी ने अस्त्र और शस्त्र दोनों में सिद्धि प्राप्त की, परंतु श्रीकृष्ण के विराट रूप के दर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। एक योद्धा का अहंकार साधना में रूपांतरित हुआ, और उसी साधना ने उन्हें उस महान भूमिका के लिए तैयार किया, जहाँ वे इतिहास के सबसे अद्वितीय बलिदान की जननी बनने वाली थीं।